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शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले शिक्षाविदों को किया गया सम्मानित

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शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले शिक्षाविदों को किया गया सम्मानित

देवबंद- शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले शिक्षाविदों को सामाजिक संस्था नज़र फाउंडेशन द्वारा पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज में एक कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविद सबा सिद्दीकी ने कहा कि आज के दौर में बच्चियों को शिक्षित करना अति आवश्यक है, जिससे हमारी बच्चियां अपने अधिकारों को जान सके और समाज में अपने परिवार का अच्छी तरह पालन पोषण कर सके, किसी पर निर्भर न रहे।
शिक्षाविद प्रोफेसर डॉक्टर शाकिर अली ने कहा कि शिक्षा हमारे अंदर की बुराइयों को दूर करती है, समाज में जिंदगी गुजारने का सलीका सिखाती है। उन्होंने हमारे देश के स्वतंत्रता सेनान एवम प्रथम शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और कहा कि अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन (11 नवंबर, 1888 - 22 फरवरी, 1958) एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान थे। वे कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत की आजादी के बाद वे एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक पद पर रहे। वे महात्मा गांधी के सिद्धांतो का समर्थन करते थे।
संस्था के चेयरमैन व कार्यक्रम संचालक नजम उस्मानी ने कहा कि जो समाज शिक्षित होगा वही उन्नति करेगा, हमें चाहिए कि चाहे एक वक्त का भोजन मिले परंतु अपने बच्चों को शिक्षित अवश्य कराएं, हमारी पीढ़ी पढ़ लिख कर सफल हो सकती है, क्योंकि आज का युग एक दूसरे से आगे निकलने का युग है, हम तभी आगे निकल सकते है जब हम शिक्षित होंगे। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता मास्टर शमीम किरतपुरी ने की, जब कि संचालन नजम उस्मानी एवम नबील मसूदी ने संयुक्त रूप से किया।कार्यक्रम को जर्रार बेग, अंसार मसूदी, जमाल नासिर उस्मानी, समाजसेवी इरम उस्मानी, शिक्षाविद नौशाद अर्शी, अब्दुलरहमान सैफ ने भी संबोधित किया।कार्यक्रम में मास्टर शमीम किरतपुरी, जकी अंजुम, डॉक्टर अदनान नोमानी, वली वकास, डॉक्टर काशिफ अख्तर, सरवर देवबंदी ने भी अपनी शायरी के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में रजिया नजम, रुबीना शहजाद, शाहनवाज उस्मानी, शबीना मुमताज, नाज़नीन तारिक, साजिदा खातून, हसीन अहमद, नबील मसूदी, इकराम अंसारी, सय्यद नजम, फैजी सिद्दीकी, मुहम्मद आसिफ, समीर उस्मानी, अब्दुल्लाह शहजाद, नबील उस्मानी, हिब्बान तारिक आदि उपस्थित रहे,,

उन्होंने क्रांतिकारी शायर अल्लामा इकबाल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वो एक समय में शायर, दार्शनिक, समाज सुधारक, सियासतदां और विद्वान थे लेकिन उनकी शायराना शख़्सियत ने उनकी शख़्सियत के तमाम पहलूओं को अपने अंदर समेट लिया था। अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए इक़बाल ने उर्दू की शे'री भाषाविज्ञान में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा किया। वो नज़्म के ही नहीं ग़ज़ल के भी बड़े शायर थे।

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