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मुस्लिम युवक को पीएसी द्वारा पिटाई करने के मामले में तीन सिपाही निलंबित

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 बैरक में मिलीं शक्तिवर्धक दवाओं व इंजेक्शन की खेप 

अप्रैल की रात दो सिपाहियों ने युवक को चारबाग से अगवा कर बैरक में पीटा था। अब इस मामले में तीन पीएसी जवानों को निलंबित कर दिया गया है।चारबाग से युवक को अगवा कर 35वीं वाहिनी पीएसी परिसर की बैरक में बंधक बनाकर पीटने के मामले में अब पीएसी के तीन जवानों को निलंबित किया गया है। ये सभी उस रात अलग-अलग गेट पर ड्यूटी पर थे। वहीं, तलाशी के दौरान बैरकों (जहां खिलाड़ी ठहरे हुए हैं) से भारी मात्रा में दवाएं व इंजेक्शन बरामद हुए हैं। इन्हें जब्त कर पीएसी के अस्पताल में रखा गया है।मेरठ पुलिस के दो सिपाही विशाल चौहान व विशांत राणा एथलीट हैं। वह खेल प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए 35वीं वाहिनी पीएसी में आए थे। यहीं पर दोनों ठहरे थे। 13 अप्रैल की रात दोनों चारबाग गए थे। यहां पर कैंट निवासी फैज नाम के युवक से मामूली विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों सिपाही उसे अगवा कर पीएसी परिसर में ले आए थे। यहां बैरक में जमकर पीटा था और उसके बाल काट दिए थे। मामले में दोनों सिपाहियों व अन्य 15 अज्ञात पर महानगर थाने में केस दर्ज किया गया था। सिपाहियों पर शांतिभंग के तहत कार्रवाई की गई थी। प्रकरण में पीएसी के तीन जवान अभिषेक यादव, शुभम कुमार और कार्तिकेय सिंह को निलंबित किया गया है। तीनों 2021 बैच के सिपाही हैं।

दरअसल, 13 अप्रैल की रात को अभिषेक यादव की गेट नंबर 2 पर रात 12 से 3 बजे तक ड्यूटी थी। वहीं, शुभम की गेट नंबर तीन व कार्तिकेय की गेट नंबर चार रात 10 से 2 बजे तक ड्यूटी थी। आरोपी सिपाही पीएसी परिसर से बाहर गए। युवक को उठाकर भीतर आए और फिर उसको बंधे तक छोड़ने गए, लेकिन किसी भी गेट पर उनकी इंट्री नहीं की गई। इस लापरवाही के लिए इन पर कार्रवाई की गई।

करीब छह घंटे तक चली थी तलाशी
सूत्रों के मुताबिक वारदात के बाद 14 अप्रैल को आईजी पीएस ने उन बैरकों की तलाशी कराई जहां पर खिलाड़ी रुके हैं। बैरकों से शक्तिवर्धक दवाओं के अलावा ऐसे इंजेक्शन बरामद हुए जिनको खिलाड़ी खेल से पहले लेते हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ ड्रग्स भी बरामद हुईं। दवाओं की मात्रा इतनी अधिक थी कि एक छोटा डाला भर गया। तलाशी शाम करीब पांच से रात 11 बजे तक चली थी। 

कोच समेत एक दर्जन लोग भी जांच के दायरे में आए
आरोपी सिपाही 13 अप्रैल की रात करीब दो बजे से महानगर पुलिस की हिरासत में थे। पुलिस ने 14 अप्रैल की दोपहर पीएसी के अफसरों को इसकी जानकारी दी। हैरानी की बात ये है कि इस बीच हुई गणना में आरोपी दोनों सिपाहियों की उपस्थिति दर्ज कर दी गई। यदि ऐसा न हुआ होता तो उसी वक्त पकड़ में आ जाता कि दो सिपाही गैर हाजिर हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक कोच समेत करीब एक दर्जन जिम्मेदार जांच के दायरे में हैं।

बयान देने से कतराते रहे अफसर
प्रकरण में बातचीत के लिए आईजी पीएस अपर्णा कुमार से संपर्क किया गया। उनका कहना था कि मामले में 35वीं वाहिनी पीएसी के कमांडेंट बयान दें। कई बार कॉल करने के बाद कमांडेंट अतुल शर्मा ने जब कॉल रिसीव की तो उन्होंने कुछ देर में जानकारी देने की बात कही। बाद में कॉल रिसीव नहीं की। कुल मिलाकर अफसर प्रकरण में बयान देने से कतराते रहे।

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